RPCAU पूसा के स्नातकोत्तर कृषि महाविद्यालय (PGCA) द्वारा गुरुवार को प्रभावी शोध लेखन और प्रकाशन विषय पर कार्यशाला
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Samastipur।RBROY
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय (आरपीसीएयू), पूसा के स्नातकोत्तर कृषि महाविद्यालय (PGCA) द्वारा गुरुवार को प्रभावी शोध लेखन और प्रकाशन विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन पंचतंत्र हॉल में किया गया। कार्यशाला में पीजी और पीएचडी के 150 से अधिक छात्रों एवं विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने ने भाग लिया।
कार्यशाला में अध्यक्षीय भाषण देते हुए कुलपति डॉ. पी. एस. पाण्डेय ने कहा कि अच्छा शोध तभी सार्थक है जब वह सही मंच पर प्रकाशित हो और किसानों व वैज्ञानिक समुदाय तक पहुंचे। शोध लेखन केवल डिग्री के लिए नहीं, बल्कि ज्ञान के सृजन और राष्ट्र के विकास के लिए होना चाहिए। उन्होंने कहा विश्वविद्यालय की कोशिश है कि पूसा का हर छात्र एवं वैज्ञानिक उच्च प्रभाव वाले जर्नल में प्रकाशन के कौशल में निपुण हो।

कार्यशाला में विशेषज्ञ के रूप में प्रो. के. वीरंजनेयुलु, पूर्व प्रोफेसर एवं विश्वविद्यालय लाइब्रेरियन, वारंगल ने दो सत्रों में छात्रों का मार्गदर्शन किया।
अपने व्याख्यान में उन्होंने कहा, कि आज के डिजिटल युग में केवल शोध करना काफी नहीं, उसे सही की-वर्ड, सही जर्नल और सही प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करना आना चाहिए। उन्होंने छात्रों और वैज्ञानिकों को प्रीडेटरी जर्नल से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शोध का एक अच्छा शीर्षक और सार ही आपके पेपर की आधी स्वीकृति तय कर देता है।
दूसरे सत्र में उन्होंने छात्रों को विदेशी विश्वविद्यालयों में पोस्ट-डॉक्टरल अवसरों, फेलोशिप और वैश्विक शोध नेटवर्किंग के टिप्स दिए।
कार्यक्रम में स्वागत भाषण देते हुए कालेज आफ बेसिक साइंस के अधिष्ठाता डॉ. अमरेश चंद्रा ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों में शोध की गुणवत्ता और लेखन कौशल को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करना है। उन्होंने कहा कि अकादमिक दृश्यता ही आज वैज्ञानिक की पहचान है और इससे विश्वविद्यालय की रैंकिंग भी सुदृढ़ होती है।
वहीं, पीजीसीए के डीन डॉ. मयंक राय, ने कहा कि स्नातकोत्तर छात्रों के लिए शोध लेखन की बारीकियों को समझना अत्यंत आवश्यक है और इस तरह की कार्यशालाएं उन्हें भविष्य में बेहतर वैज्ञानिक बनने में मदद करेंगी।
कार्यशाला के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र भी हुआ, जिसमें छात्रों ने जर्नल चयन, प्लेजरिज्म, इम्पैक्ट फैक्टर और रिसर्च प्रपोजल लेखन से जुड़े सवाल पूछे।
कार्यशाला में डीन फिशरीज डॉ पी पी श्रीवास्तव, निदेशक एग्री-बिजनेस डॉ रामदत्त, पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ राकेश मणि शर्मा, डॉ कुमार राज्यवर्धन समेत विभिन्न शिक्षक वैज्ञानिक एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।
